न्यूक्लियर डील पर मच रही मारकाट के सिर्फ राजनीतिक आयाम ही नहीं हैं। इसके आर्थिक वित्तीय आयाम भी हैं। वो सारी कंपनियां जो किसी न किसी तरह से न्यूक्लियर टेकनोलोजी में विशेषज्ञता रखती हैं, इस डील से लाभान्वित होंगी। एल एंड टी ऐसी ही कंपनी है, जो इस डील के कार्यान्वित होने से लाभान्वित होगी। एल एंड टी न्यूक्लियर बिजली घरों के लिए काम करने का तजुरबा है। वैसे भी एल एंड टी एक बहुआयामी कंपनी है। इंजीनियरिंग के क्षेत्र में इसकी विशेषज्ञता खासी पुरानी है। इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की यह एक पुरानी और अनुभवी कंपनी है।
8 जुलाई, 2008 को लेफ्ट के समर्थन वापसी की घोषणा और न्यूक्लियर डील के पूरा होने की संभावनाओं के मजबूत होने के बाद, 9 जुलाई, को ही सुबह इस शेयर के भाव में करीब 94 रुपये की बढ़ोत्तरी दर्ज की गयी है।
2491.20 रुपये पर उपलब्ध इस शेयर में निवेश की निवेशक सोच सकते हैं, क्योंकि इसकी हाल की परफारमेंस भी बेहतरीन रही है। इसके वित्तीय आंकड़ों पर नजर डालें, तो साफ होता है कि मार्च 2007 को खत्म हुई वित्तीय वर्ष में इस कंपनी ने 1403.22 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया था। जबकि मार्च, 2008 को खत्म हुई तिमाही में इस कंपनी का शुद्ध लाभ 966.76 करोड़ रुपये था। मार्च 2008 की तिमाही का शुद्ध लाभ मार्च 2007 की तिमाही के शुद्ध लाभ के मुकाबले करीब 38 प्रतिशत ज्यादा था। अर्थव्यवस्था में इन्फ्रास्ट्रक्चर की जो बूम चल रही है, उसका फायदा भी इस कंपनी को मिल रहा है।
पिछले बारह महीनों में इस कंपनी की प्रति शेयर आय रही है-74.35 रुपये। इस हिसाब से इसकी कीमत यानी 2491.20 रुपये इसकी प्रति शेयर आय के मुकाबले 33.81 गुना ज्यादा है। पर इस कंपनी की मजबूती को देखते हुए यह कीमत दी जा सकती है। जिन निवेशकों ने अब से करीब दो साल पहले यानी सात जुलाई 2006 को इस शेयर में निवेश किया था, उन्हे यह शेयर 1086.28 रुपये में मिल गया था। यानी दो साल का सब्र रखने वाले निवेशकों ने इस शेयर से करीब 129 प्रतिशत कमा लिये हैं। दो साल में यह रिटर्न किसी भी दृष्टि से बेहतरीन माना जा सकता है।
वैसे भी यह शेयर उन शेयरों में शुमार किया जा सकता है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के विकसित होने के साथ लगातार मजबूत होंगे। जो निवेशक तीन से से पांच सालों के इसमें निवेश कर सकते हैं, उनके लिए यह शेयर खासा रिटर्न प्रदायक साबित होगा।
डिस्क्लेमर-निवेशक लाभ और हानि के लिए खुद जिम्मेदार होंगे। लेखक का इस शेयर में निवेश संभव है।
भेड़चाल से अलग हटकर चलने वाले जोखिम में ज्यादा रहते हैं, पर दीर्घकाल में उनके फायदे भी ज्यादा होते हैं। यही हाल शेयर बाजार में होता है। एक वक्त आता है जब किसी उद्योग विशेष के शेयरों की पिटाई होती है। एक वक्त आता है, जब किसी उद्योग विशेष के शेयर लगातार धुआंधार ऊपर जाते जाते हैं। जैसे कुछ महीनों पहले साफ्टवेयर के शेयरों के साथ हुआ था, तमाम बेहतरीन शेयर बुरी तरह पिटे थे। पर अब उन शेयरों में कुछ उठान देखने को मिलती है। साफ्टवेयर शेयरों की पिटाई के दौर में जिन निवेशकों ने उनमें निवेश किया होगा, आज वाकई वो मुस्कुरा रहे होंगे। पर तब उन शेयरों में निवेश खासी जोखिम भरा काम था।
शेयर बाजार में उलटी सोच के बड़े रिजल्ट आते हैं। इस तरह की सोच की रणनीति को कोंट्रा रणनीति कहते हैं यानी बाजार से उलटा सोचना। देर सबेर एक वक्त ऐसा आता है कि जब उल्टी सोच का निवेश बेहतरीन रिजल्ट देता है । इस तरह की रणनीति पर काम करने वाली एक मुचुअल फंड स्कीम है-मैग्नम कोंट्रा। स्टेट बैंक आफ इंडिया मुचुअल फंड की यह स्कीम जुलाई, 1999 में लांच की गयी थी। इसकी परफारमेंस के हाल के आंकड़े इस प्रकार हैं-
18 जून, 2008 को नेट एसेट वैल्यू यानी एनएवी-44.49, यह एनएवी शेयर बाजार की विकट ऊंचाई के दौर में 64 रुपये तक गयी है, 4 जनवरी, 2008 को और पिछले साल 21 अगस्त 2007 ने इस एनएवी ने 40.32 रुपये का आंकड़ा भी छुआ है। मतलब मोटे तौर पर देखें, अब भी यह एनएवी अपने एक साल के न्यूनतम स्तर के आसपास ही चल रही है।
एक साल में इस स्कीम ने करीब 10.31 प्रतिशत का रिटर्न दिया है।
तीन सालों का हिसाब देखे, तो इस फंड ने करीब 36.74 प्रतिशत सालाना का रिटर्न दिया है।
पांच सालों का हिसाब देखें, तो इस फंड ने करीब 56.45 प्रतिशत का सालाना रिटर्न दिया है। यानी लंबी अवधि के निवेश में उलटी सोच ज्यादा बेहतरीन रिटर्न देती है। इसकी वजह यह है कि दीर्घ अवधि में बाजार तमाम शेयरों की वैल्यू समझता है और वह वैल्यू बढ़े हुए बाजार भावों की शक्ल में सामने आती है। फिलहाल समूचे शेयर बाजार की पिटाई का दौर चल रहा है। इसलिए अभी इसमें निवेश करने के बाद तीन से पांच सालों की अवधि में बेहतरीन रिटर्न की उम्मीद की जा सकती है। पर ध्यान देने की बात यह है कि उल्टी सोच खासे धैर्य की मांग करती है।
इस फंड के पास निवेशकों की करीब 2385.04 करोड़ रुपये की रकम है निवेश के लिए। इस रकम का करीब 4.61 प्रतिशत हिस्सा रिलायंस इंडस्ट्री में निवेशित है। करीब 4.02 प्रतिशत रकम शेयर इनफोसिस में निवेशित हैं। करीब 3.48 प्रतिशत रकम जेपीएसोसियेट्स में निवेशित है। ये शेयर फिलहाल खासी पिटाई झेल रहे हैं। पर हमेशा यह सीन नहीं रहने वाला है।
उलटी सोच के जादू में जो यकीन करते हैं और धैर्य रखते हैं, उनके लिए मैग्नम कोंट्रा बेहतरीन निवेश साबित हो सकता है।
डिस्क्लेमर-उपयुक्त स्कीम में लेखक का निवेश हो सकता है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिम के अधीन होते हैं। निवेश के लाभ व हानि निवेशकों के ही होंगे। लेखक की उसमें कोई जिम्मेंदारी नहीं होगी।
शेयर बाजार जब बहुत जबरदस्त तेजी पर था, तब आईटीसी का शेयर कभी चर्चा का विषय नहीं बना। आईटीसी की रफ्तार धीमी रही। पर जब से शेयर बाजार सुस्त हुआ है,आईटीसी का शेयर चर्चा में है। शेयर बाजार की विकट धीमी रफ्तार के मुकाबले आईटीसी का शेयर अब सुऱक्षित निवेश माना जा सकता है। आईटीसी सिगरेट के धंधे के अलावा पेपर और पैकेजिंग, कृषि, गैर टिकाऊ उपभोक्ता साज सामान और होटल के कारोबार में है। सिगरेट के धंधे की यह अग्रणी कंपनी है। सनफीस्ट बिस्कुट, आशीर्वाद आटा इसके गैर टिकाऊ उपभोक्ता साज सामान के धंधों के बड़े ब्रांड हैं।
यूं आईटीसी को मोटे तौर पर सिगरेट कंपनी ही माना जाता है, पर तथ्य यह है कि इसकी कुल बिक्री का करीब 59 प्रतिशत गैर तंबाकू उत्पादों से आता है। हां यह बात अलग है कि कुल शुद्ध मुनाफे का 83 प्रतिशत तंबाकू के उत्पादों से ही आता है। यानी कंपनी इस स्थिति में है कि तंबाकू के उत्पादों से कमाये और उन्हे दूसरे कारोबारों में निवेश करे। और यही इस कंपनी ने किया भी है। आईटीसी भारत की उन सफल कंपनियों में गिनी जाती है, जिन्होने तमाम धंधों में एक साथ सफलतापूर्वक काम किया है।
आईटीसी का शेयर 6 जून, 2008 को नेशनल स्टाक एक्सचेंज में 213.45 रुपये पर बंद हुआ है। एक साल पहले जिन निवेशकों ने यह शेयर खरीदा था, वह अब करीब 31.74 प्रतिशत के मुनाफे में हैं। एक साल में इतना मुनाफा कम नहीं होता। तीन साल पहले यानी छह जून 2005 को जिन्होने इस शेयर को खऱीदा था, वो इससे सौ प्रतिशत से ज्यादा कमा चुके हैं। तीन सालों में सौ प्रतिशत रिटर्न कम नहीं होते।
आईटीसी के धंधों की खास बात यह है कि इसका कारोबार ग्लोबल मंदी या घरेलू मंदी से ज्यादा प्रभावित होने वाला नहीं है। सिगरेट, आटा उस तरह के उप्ताद हैं, जिन पर मंदी का बहुत कम असर पड़ता है। इसलिए शेयर बाजार के ठंडक के माहौल में आईटीसी के शेयर को मंदीप्रूफ शेयर के बतौर देखा जा सकता है।
मार्च, 2008 को खत्म हुए वित्तीय वर्ष में इस कंपनी ने करीब 21.966.84 करोड़ रुपये की कुल बिक्री दिखायी है, यह बिक्री मार्च, 2007 में खत्म हुए साल की बिक्री के मुकाबले करीब बारह प्रतिशत ज्यादा है। मार्च, 2008 में आईटीसी ने करीब 3120 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दिखाया है। यह मार्च, 2007 के शुद्ध लाभ के मुकाबले करीब सोलह प्रतिशत ज्यादा है।
कंपनी जिन कारोबारों में हैं, उनमें देर सबेर बूम आने की पूरी संभावना है। कंपनी ने ई चौपाल नामक परियोजना में खासा निवेश किया है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुधऱने के साथ ई चौपाल से जुड़े मुनाफे बढ़ेंगे।
कंपनी की पिछले बारह महीने की प्रति शेयर आय रही है-8.28 रुपये। 6 जून की कीमत 213.45 रुपये इसकी प्रति शेयर आय के मुकाबल 25.77 गुना है। कंपनी के विविध कारोबारों और परफारमेंस को देखते हुए इसकी यह कीमत दी जा सकती है। जो निवेशक तीन से पांच सालों तक के लिए धैर्य दिखाने में सक्षम हैं, उनके लिए यह शेयर खासा लाभकारी साबित हो सकता है।
डिस्क्लेमर-शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिम के आधीन है। इस शेयर में लेखक का निवेश हो सकता है। लाभ व हानि के लिए निवेशक खुद जिम्मेदार होंगे।
मीडिया और मनोरंजन अर्थव्यवस्था के उन उद्योगों में से है, जो बहुत तेजी के साथ विकास कर रहे हैं। यह अनायास नहीं है कि लगभग हर दूसरे दिन कोई भारतीय मीडिया कंपनी किसी विदेशी मीडिया कंपनी के साथ गठजोड़ का ऐलान कर रही है। तमाम विदेशी संगठन भारतीय मीडिया बाजार में बेहतरीन भविष्य देख रहे हैं। मीडिया मोटे तौर पर कई भागों में विभाजित उद्योग है। प्रिंट मीडिया, टीवी मीडिया, इंटरनेट मीडिया इसके हिस्से हैं।
पूरे विश्व में विकसित देशों में अखबारों का सर्कुलेशन घट रहा है। पर भारत में खास तौर पर हिंदी के अखबार लगातार अपने सर्कुलेशन को बढते हुए दिख रहे हैं। तमाम अखबार और ज्यादा संसाधन जुटाने के लिए पब्लिक को शेयर जारी करके संसाधन जुटा रहे हैं। कुल मिलाकर मीडिया उद्योग एक आकर्षक उद्योग के तौर पर उभरा है। आने वाले पांच दस सालों में इस उद्योग की तस्वीर और बदली हुई दिखायी देगी।
मीडिया और मनोरंजन कंपनियों पर फोकस रिलायंस मीडिया एंड इंटरनेटमेंट फंड के हाल के रिजल्ट तो बहुत अच्छे नहीं रहे हैं, पर आने वाले तीन से पांच सालों के धैर्य के साथ निवेश करने वाले निवेशक इस निवेश से कुछ बेहतर रिटर्न की उम्मीद कर सकते हैं। अन्य शब्दों में मीडिया और मनोरंजन उद्योग पर फोकस इस फंड में निवेश उस लंबी फिल्म की तरह है, जिसका दि एंड तीन से पांच सालों बाद बेहतरीन हो सकता है।
हाल में इस फंड की परफारमेंस इस प्रकार रही है।
30 मई, 2008 को इस फंड की नैट एसेट वैल्यू यानी एनएवी-27.40 रुपये
एक साल का रिटर्न इसका नकारात्मक रहा है यानी एक साल पहले जिसने इसमें निवेश किया है, उसे करीब 5.15 प्रतिशत का घाटा हुआ है। हां तीन साल पहले जिन्होने इसमें निवेश किया है, उन्हे इसमें 33.59 प्रतिशत प्रति वर्ष के रिटर्न मिले हैं। यानी लंबे समय तक निवेशित रहने वाले निवेशकों को इससे फायदा मिला है।
सितंबर 2004 में शुरु किये गये इस फंड में तमाम निवेशकों की करीब 240.59 करोड़ रुपये की रकम लगी है। बाजार में तेजी के समय में इस फंड की नेट एसेट वैल्यू 4 जनवरी, 2008 को 42.99 रुपये तक भी जा चुकी है और पिछले एक साल में इसका न्यूनतम भाव 24 मार्च, 2008 को ही दर्ज किया गया है 25.76 रुपये।
यानी इस फंड ने खासे उतार-चढ़ाव दर्ज किये हैं। इस फंड में निवेश की एक बड़ी जोखिम यह है कि यह सेक्टर आधारित फंड है यानी कि सारी रकम मीडिया और मनोरंजन उद्योग की कंपनियों में ही लगेगी। इसलिए निवेशक अपने निवेश का एक हिस्सा इसमें लगा सकते हैं। पर इस फंड में धैर्य बहुत जरुरी है।
डिस्क्लेमर-इस फंड में लेखक का निवेश हो सकता है। मुचुअल फंड में निवेश बाजार जोखिम के अधीन होता है। निवेशक लाभ व हानि दोनों के लिए खुद ही जिम्मेदार होंगे।
बैंकिंग उद्योग के शेयर इधर पिटाई के दौर से गुजर रहे हैं। लगातार बढ़ती महंगाई के चलते ब्याज दरों में बढ़ोत्तरी हुई है। महंगाई बढ़ने के आंकड़े आते हैं, तो साथ में ये आशंका भी लाते हैं कि ब्याज दर और बढ़ेंगी। ब्याज दरों का बढ़ना बैंकों के लिए अच्छा नहीं माना जाता। सो हाल में बैकिंग शेयर बुरी तरह पिटे हैं। पर शेयर बाजार में निवेश का एक नियम यह भी है कि जिन शेयरों की विकट पिटाई हो रही है, उन्हे लंबी अवधि के लिए खरीदकर कर इंतजार करना बेहतर रहता है।
सिटी यूनियन बैंक का शेयर भी कुछ इस किस्म का शेयर है, जिसमें धैर्यवान निवेशक कमाने की उम्मीद कर सकते हैं। यूं यह बैंक इतना बड़ा नही है कि इसके नाम से आम बैंक उपभोक्ता वाकिफ हों। सिटी यूनियन बैंक दक्षिण भारत का एक छोटा बैंक है। पर छोटे बैंकों की इधर बड़ी संभावनाएं हैं। आने वाले पांच सात सालों में बैंकिंग उद्योग में टेक ओवर और विलय के दौर चलने की संभावना है। ऐसी सूरत में जो मजबूत छोटे बैंक हैं, वो बड़े बैंकों में जायेंगे। हाल में सेचुरियन बैंक आफ पंजाब का एचडीएफसी बैंक में विलय इस बात का उदाहरण है। बैंकिंग उद्योग में छोटे और मजबूत बैंकों की तरफ बड़े खिलाड़ियों की निगाहें रहेंगी। लिहाजा इन बैंकों के शेयर भविष्य में ऊंचे जायेंगे, ऐसा मानकर चला जा सकता है।
सिटी यूनियन बैंक 23 मई, 2008 को नेशनल स्टाक एक्सचेंज पर 31.75 रुपये पर बंद हुआ है। एक साल पहले जिन निवेशकों ने इस शेयर में निवेश किया था, उनका रिटर्न करीब 56 प्रतिशत के आसपास रहा है। किसी भी लिहाज से यह रिटर्न बेहतरीन माना जा सकता है। पिछले तीन महीनों में ही इस शेयर ने करीब 35 प्रतिशत का रिटर्न दिया है।
हाल में इस बैंक ने 2007-08 के नतीजे पेश किये हैं। उनके मुताबिक इस बैंक ने 2007-08 में करीब 101.73 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया है। इसके पिछले साल के शुद्ध लाभ के मुकाबले यह लाभ करीब 42 प्रतिशत ज्यादा है। 2006-07 में यह शुद्ध लाभ करीब 71.81 करोड़ रुपये था।
20007-08 के आंक़ड़ों के हिसाब से इस बैंक की प्रति शेयर आय करीब 3.56 रुपये बैठती है। इसकी वर्तमान कीमत इसकी प्रति शेयर आय के मुकाबले करीब 8.92 गुना है।
इसके भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए इसकी वर्तमान कीमत दी जा सकती है। यह बैंक श्रीलंका के एक महत्वपूर्ण बैंक के साथ कुछ नयी परियोजनाओं पर काम कर रहा है। जो निवेशक तीन से पांच साल तक का धैर्य रख सकते हैं, उन्हे यह शेयर बेहतरीन परिणाम दे सकता है। बैंकिंग जगत के संकट के चलते तमाम बैंकिंग शेयर भले ही परेशानी में दिखायी दे रहे हों। पर तमाम कारणों से छोटे मजबूत बैंकों का भविष्य तो उज्जवल ही है।
डिस्क्लेमर-शेयर बाजार में निवेश तमाम बाजार जोखिमों के अधीन होता है। इसलिए निवेशकों को घाटा भी हो सकता है। इस शेयर में लेखक का भी निवेश हो सकता है।
स्टाक बाजार में खरीदने के मौके आम तौर पर तब होते हैं, जब पर्याप्त हाहाकार मच चुका हो। और बेचने के मौके तब होते हैं, जब बाजार में उत्साह अपनी चरम सीमा पर हो। यह बात सुनना जितना आसान है, समझना उतना ही मुश्किल है। शेयर बाजार में जो स्थिति अभी है, उसमें खरीदने की बात कम हो रही है। तमाम कारणों से निवेशकों की चिंताएं बढ़ रही हैं। तेल के भाव 128 डालर प्रति बैरल से ऊपर जाने के आसार हों, थोक मूल्य सूचकांक के आधार पर महंगाई आठ प्रतिशत का आंकड़ा पार करने के लक्षण दिखा रही हो, तो चिंताएं स्वाभाविक हैं। शेयर बाजार ऐसी सूरत में ऊपर जायेगा, या नहीं या कितना नीचे जायेगा, ये सवाल ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
पर बाजार का इतिहास बताता है कि अगर निवेशक तीन से पांच सालों के लिए निवेश कर रहा है, तो उसे ऐसे सवालों से परेशानी नहीं होनी चाहिए। उलटे ऐसे गिरावट के मौकों में बेहतरीन अवसरों की तलाश की जानी चाहिए। सुंदरम बीएनपी कैपेक्स अपोर्चुनिटीज ऐसा ही मुचुअल फंड है, जिसमें अभी निवेश करके भविष्य में बेहतरीन रिटर्न हासिल करने की सोची जा सकती है। कैपेक्स अपोर्चुनिटीज मतलब पूंजीगत अवसरों पर फोकस होने वाला फंड।
यह फंड उन कंपनियों में निवेश करता है, जिन्हे अर्थव्यवस्था में चल रहे निवेश से फायदा मिलता है। मतलब यह फंड उन कंपनियों पर फोकस करता है, जिनका अर्थव्यवस्था में होने वाले निवेश से सीधा ताल्लुक है। जैसे अगर तमाम कंपनियों में प्लांट मशीनरी वगैरह की खरीद होनी है, तो फिर उन कंपनियों का फायदा होगा, जो प्लांट मशीनरी वगैरह के कारोबार में हैं या फिर उनके किसी और तरह से लाभान्वित होने की संभावना हो।
इसकी पऱफारमेंस हाल में इस तरह की रही है-
16 मई, 2008 को इस फंड की नेट एसेट वैल्यू थी 23.60 रुपये। पिछले एक साल में यह फंड 33.78 रुपये की ऊंचाई भी देख चुका है और 17.70 रुपये की न्यूनतम कीमत भी। सितंबर 2005 में शुरु हुए इस फंड के पास निवेशकों की करीब 691 करोड़ रुपये की रकम है। 16 मई को इस फंड ने 1 महीने के हिसाब से करीब दो प्रतिशत का रिटर्न दिया था। एक साल के हिसाब से देखें, तो इस फंड ने करीब 34.20 प्रतिशत का रिटर्न दिया है।
यह रिटर्न इस ऊहापोह और अनिश्चिचता के समय में बेहतरीन माना जा सकता है।
हालांकि मुचुअल फंड के पिछले नतीजे भविष्य की परफारमेंस की गारंटी नहीं होते, फिर कंपनी का निवेश देखकर एक अंदाज लगाया जा सकता है कि भविष्य में फंड किस दिशा में जा सकता है।
30 अप्रैल 2008 को इस फंड का करीब 7.50 प्रतिशत निवेश एलएंडटी में था। करीब 5.,65 प्रतिशत निवेश भेल में था। करीब 4.29 प्रतिशत निवेश पंज लायड में था। 3.43 प्रतिशत निवेश रिलायंस इंडस्ट्रीज में था। करीब 3.43 प्रतिशत निवेश सीमेन्स में था।
ये वे कंपनियां हैं, जो अर्थव्यवस्था में चल रहे निवेश बूम से लाभान्वित हुई हैं और इनके लाभान्वित होने की संभावना है।
तीन से पांच साल के लिए निवेश करने वाले निवेशक इस फंड में निवेश करने की सोच सकते हैं।
डिस्क्लेमर-मुचुअल फंड निवेश बाजार जोखिम के अधीन होते हैं। निवेशक लाभ हानि के लिए खुद ही जिम्मेदार होंगे। इस लेखक का निवेश इस फंड में हो सकता है।
भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर जो फील गुड इंडिया शाइनिंग टाइप की रिपोर्टें आ रही थीं, उनकी स्पीड हाल में कुछ कम ही हो गयी है। शेयर बाजार में लगातार उछाल की बात इतिहास की बात लग रही है। ऐसे वक्त में निवेश के लिए महत्वपूर्ण मौके बाजार में मौजूद हैं। अमेरिका की मंदी भारतीय बाजारों के लिए चिंताजनक है। ऐसी सूरत में उन कंपनियों के शेयरों से दूर रहना चाहिए, जिनका ताल्लुक सीधे तौर पर अमेरिकी अर्थव्यवस्था से हो। यूं अब इस ग्लोबल अर्थव्यवस्था में ऐसा कुछ नहीं है, जिसका ताल्लुक अमेरिकन अर्थव्यवस्था से ना हो। फिर भी बहुत से कारोबार ऐसे हैं, जिनका ताल्लुक अमेरिकन अर्थव्यवस्था से कम ही है।
जैसे इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कारोबारों पर अमेरिकन मंदी का असर कम पड़ने या नहीं पड़ने की संभावना है। इसलिए निवेशक ऐसे अवसर तलाश सकते हैं, जो अमेरिकी मंदी के असर से मुक्त हों। ऐसा ही एक एक शेयर है आईडीएफसी यानी इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फाइनेंस कंपनी। यह कंपनी इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी परियोजनाओं को फाइनेंस करती है। और हाल के इसके परिणाम बताते हैं कि इसका यह कारोबार खासा मुनाफा वाला है।
आईडीएफसी का शेयर 14 मई, 2008 को नेशनल स्टाक एक्सचेंज में 167 रुपये पर बंद हुआ था। पिछले एक साल में यह शेयर 72 रुपये तक गिर चुका है, और 235 रुपये तक की ऊंचाई भी देख चुका है। अब से करीब एक साल पहले यानी 11 मई, 2007 को इस शेयर का भाव था 106.85 रुपये। यानी जिन निवेशकों ने एक साल पहले इसमें निवेश किया है, वे अब तक करीब 56 प्रतिशत का रिटर्न हासिल कर चुके हैं। गिरे हुए बाजार में करीब 56 प्रतिशत का रिटर्न बेहतरीन ही माना जा सकता है।
करीब तीन महीने पहले यानी 13 फरवरी, 2007 को इस शेयर का भाव था-181.50 रुपये। इस भाव पर निवेश करने वाले तो करीब 8 प्रतिशत के घाटे में हैं।
मतलब यह है कि तसल्ली के साथ थोड़े लंबे समय के लिए निवेश करने वाले निवेशक इस शेयर से बेहतरीन रिटर्न की उम्मीद कर सकते हैं। अर्थव्यवस्था में इन्फ्रास्ट्रक्चर बूम पर है। बहुत कुछ बनना बनाया जाना बाकी है। उसके लिए रकम की व्यवस्था जो संस्थान करेंगे, आईडीएफसी उनमें से एक है। इसके हाल के परिणाम बताते हैं कि मार्च, 2008 में खत्म हुई तिमाही में इस कंपनी का शुद्ध मुनाफा था-123.25 करोड़ रुपये। मार्च, 2007 में खत्म हुई तिमाही के शुद्ध मुनाफे के मुकाबले यह मुनाफा करीब 45 प्रतिशत ज्यादा था। मार्च, 2007 को खत्म हुए पूरे साल में इस कंपनी का शुद्ध लाभ था-462.87 करोड़ रुपये।
पिछले बारह महीनों के हिसाब से देखें, तो इस कंपनी की प्रति शेयर आय बनती है-5.17 रुपये। इस हिसाब से देखें, तो 167 रुपये का भाव इसके पिछले बारह महीनों की प्रति शेयर आय के मुकाबले करीब 32 गुना ज्यादा है। इस कंपनी के विकास की संभावनाओँ को देखते हुए इसका इस भाव पर खऱीदा जा सकता है और इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास के फायदों में अपना हिस्सा लिया जा सकता है।
डिस्क्लेमर-शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है। निवेशक अपने लाभ व हानि के लिए खुद ही जिम्मेदार होंगे। इस शेयर में लेखक का निवेश हो सकता है।
शेयर बाजार की गिरावट में कई उद्योगों के शेयर कराह रहे हैं।
ऐसी सूरत में उन उद्योगों की कंपनियों में निवेश के बारे में निवेशक सोच सकते हैं, जिनके शेयरों का भविष्य बेहतरीन दिखायी दे रहा है। इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े शेयर ऐसे शेयर हैं। इन्फ्रास्ट्रक्चर से आशय सिर्फ पुलों और सड़कों से नहीं होता। बैंक और रिफाइनरी भी इन्फ्रास्ट्रक्चर का हिस्सा मानी जा सकती हैं।
इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनियों में निवेश के बजाय एक बेहतर विकल्प यह हो सकता है कि इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े किसी मुचुअल फंड में निवेश किया जाये। ताकि निवेश कई सारी कंपनियों में जाये और जोखिम में कमी हो जाये।
इस तरह का एक मुचुअल फंड है-आईसीआईसीआई इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड।
2 मई, 2008 को इस फंड की नेट एसेट वैल्यू यानी एनएवी थी-29.49 रुपये।
पिछले 52 हफ्तों में इस फंड की एनएवी 36.61 रुपये की ऊंचाई भी देख चुकी है और 19.24 रुपये तक भी गिर चुकी है।
इसकी हाल की परफारमेंस इस प्रकार रही है-
एक साल के रिटर्न-53.67 प्रतिशत
एक महीने के रिटर्न-10 प्रतिशत
तीन महीने के रिटर्न- 3.09 प्रतिशत की गिरावट
इस फंड के आंकड़े बताते हैं कि गिरी हुई हालत में भी इस फंड का रिटर्न 53.67 प्रतिशत रहा है। एक महीने का रिटर्न 10 प्रतिशत रहा है। यानी इस फंड में शामिल कंपनियों के शेयरों में एक महीने में सुधार का रुख दिखाया है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े शेयरों में निवेश निकट भविष्य में रिटर्न देंगे, ऐसी उम्मीद की जा सकती है।
इस फंड के पास 31 मार्च, 2008 को निवेशकों की करीब 5390.59 करोड़ रुपये की रकम थी निवेश के लिए। फंड के निवेश का करीब 7.61 प्रतिशत भाग रिलायंस इंडस्ट्रीज में लगा था। करीब 5.67 प्रतिशत भाग भारती एयरटेल में निवेशित था। करीब 5.40 प्रतिशत हिस्सा जिंदल स्टील में लगा था। लारसन एंड टूब्रो में करीब पांच प्रतिशत हिस्सा निवेशित था। आईसीआईसीआई बैंक में करीब 4.50 प्रतिशत निवेशित था।
इनर्जी क्षेत्र में इस फंड का करीब 13.68 प्रतिशत फंड निवेशित है।
धातु से जुड़े शेयरों में इस फंड का करीब 13.54 प्रतिशत फंड निवेशित है।
कुल मिलाकर इसमें फंड में निवेश अर्थव्यवस्था में भविष्य में निवेश माना जा सकता है।
डिस्क्लेमर-इस फंड में लेखक का निवेश हो सकता है। निवेशक लाभ और हानि के लिए खुद ही जिम्मेदार होंगे। शेयर बाजार में निवेश बाजार के जोखिम के आधीन होते हैं।
अर्थव्यवस्था में धीमेपन की बात कही जा रही है। पर जिस क्षेत्र में धीमापन आने के आसार कम हैं, वह है इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र। अगर देश की अर्थव्यवस्था को सात प्रतिशत साल की रफ्तार से भी विकास करना है, तो भी सड़क, पुल, अस्पताल, तेल, बिजली चाहिए ही चाहिए। अर्थव्यवस्था के विकास की दर भले ही नौ प्रतिशत ना रहे, पर इन्फ्रास्ट्रक्चर तो चाहिए ही चाहिए। ऐसी सूरत में इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनियों का भविष्य तो बेहतर ही है। यह दिखायी भी पड़ता है।
ऐसी स्थिति में निवेशक टाटा इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड की ओर देख सकते हैं, यह फंड इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनियों पर ही फोकस है।
हाल में इस फंड की परफारमेंस इस प्रकार रही है-
25 अप्रैल 2008 को रिटर्न
तीन महीने के रिटर्न-12.43 प्रतिशत का घाटा
1 साल का रिटर्न -40.38 प्रतिशत
तीन साल का रिटर्न-45.31 प्रतिशत सालाना
शेयर बाजार के ऐसे हाहाकारी समय में ऐसे रिटर्न संतोषजनक कहे जा सकते हैं।
धैर्य रखने वालों के यह फंड बेहतरीन रिटर्न लेकर आ सकता है। भारतीय अर्थव्यवस्था में इन्फ्रास्ट्रक्चर की सूरत काफी कुछ पांच सात सालों बाद बदली हुई होगी। उस बदंली हुई सूरत का फायदा इस फंड को मिलेगा, उन कंपनियों को मिलेगा, जिनमें इस फंड का निवेश का है।
25 अप्रैल, 2008 को इस फंड की नेट एसेट वैल्यू यानी एनएवी 33.16 रुपये थी।
पिछले एक साल में यह एनएवी 45.51 रुपये की ऊंचाई देख चुकी है और 23.65 रुपये तक गिर भी चुकी है।
31 मार्च 2008 को इस फंड के पास निवेशकों की करीब 2420.90 करोड़ रुपये की रकम थी निवेश के लिए।
निवेश योग्य रकम का करीब 4.76 प्रतिशत हिस्सा बीएचईल में लगा था। करीब 4.46 प्रतिशत हिस्सा लारसन एंड टूब्रो में निवेशित था। करीब 3.44 प्रतिशत रिलायंस इंडस्ट्रीज में निवेशित था। 2.91 प्रतिशत हिस्सा केयर्न इंडिया में निवेशित था। करीब 2.43 प्रतिशत हिस्सा टाटा पावर में निवेशित था।
गौरतलब ये सारी कंपनियां भारत के भविष्य से लाभान्वित होने वाली कंपनियां हैं ।
इस फंड के निवेश का उद्योगवार विश्लेषण करें, तो साफ होता है कि कुल निवेश का 18.82 प्रतिशत इनर्जी क्षेत्र में लगा है और करीब 15 प्रतिशत धातु से जुड़ी कंपनियों में लगा है। इन क्षेत्रों का भविष्य खासा जोरदार है।
पर निवेशकों को यहां यह याद रखना चाहिए कि एक ही सेक्टर पर फोकस फंड में जोखिम ज्यादा होती है। इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर पर फोकस इस फंड में यह जोखिम तो है। पर अर्थव्यवस्था के भविष्य के अनुमानों को देखकर यह जोखिम लिया जा सकता है।
डिस्क्लेमर-इस लेखक का निवेशक इस फंड में हो सकता है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिम के आधीन होते हैं। लाभ व हानि के लिए निवेशक खुद ही जिम्मेदार होंगे।
कई शेयरों में निवेश में बहुत गहरे विश्लेषण की जरुरत नहीं होती।
कामनसेंस से सोचने से काम चल जाता है। केयर्न इंडिया का शेयर ऐसा ही एक शेयर रहा है।
केयर्न इंडिया भारत की उन चुनिंदा कंपनियों में है,जिनके पास कच्चे तेल के भंडार हैं। राजस्थान में इस कंपनी के पास कच्चे तेल के भंडार हैं। अनुमान के मुताबिक इस दशक के अंत तक भारत में होने वाले कुल कच्चे तेल के उत्पादन का करीब बीस प्रतिशत इस कंपनी से आयेगा। राजस्थान के तेल भंडारों से कंपनी को करीब पच्चीस सालों तक तेल मिलने की उम्मीद है।
कच्चे तेल के भावों का इंटरनेशनल सीन बताता है कि भावों में नरमी आने के आसार फिलहाल नहीं हैं। 110 प्रति बैरल के भावों से ऊपर रहने वाला कच्चा तेल यह सुनिश्चित करेगा कि कच्चे तेल के भंडार की मालिक कंपनियों के शेयरों के भाव निकट भविष्य में ऊपर ही रहें।
केयर्न इंडिया एक बहुराष्ट्रीय कंपनी के कारोबार का हिस्सा है।
25 अप्रैल, 2008 को नेशनल स्टाक एक्सचेंज पर इसका भाव रहा था-255.08 रुपये।
एक साल पहले यानी 25 अप्रैल, 2007 को इसका भाव था-136.55 रुपये। यानी एक साल में इस शेयर ने करीब 87 प्रतिशत का रिटर्न दिया है।
सेनसेक्स के ऐसे पिटाई के समय में ऐसे रिटर्न बेहतरीन ही माने जा सकते हैं।
इस शेय़ऱ में उन निवेशकों को निवेश करना चाहिए जो भारतीय अर्थव्यस्था की दीर्घकालीन बेहतरी के प्रति आश्वस्ति का भाव रखते हैं। किसी देश की अर्थव्यवस्था के विकास का मतलब होता है कि वहां की क्रय क्षमता में विकास। क्रय क्षमता का विकास का एक सीधा सा परिणाम होता है कि आटोमोबाइल की खरीद में बढ़ोत्तरी और आटोमोबाइल की खरीद में बढ़ोत्तरी का सीधा सा मतलब है कि पेट्रोलियम उत्पादों की मांग बढ़ेगी।
यह सब जानने के लिए विशेषज्ञ होने की जरुरत नहीं है।
पर इस शेयर में धैर्य की जरुरत है। अभी इस कंपनी का कारोबार शुरु नहीं हुआ है। अभी मामला शुरुआती स्टेज का है। कंपनी के आंकड़े बताते हैं कि दिसंबर, 2006 को खत्म हुए साल में इस कंपनी की बिक्री करीब छह करोड़ रुपये की थी और इस पर घाटा था करीब 29 करोड़ रुपये। दिसंबर, 2007 को खत्म हुई तिमाही में इस कंपनी का घाटा था- करीब 54 करोड़ रुपये।
इस घाटे के बावजूद उम्मीद की जा सकती है कि तीन से पांच सालों तक का धैर्य रखने वाले निवेशक इस शेयर से निराश नहीं होंगे।
डिस्क्लेमर-इस लेखक का निवेशक इस शेयर में हो सकता है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिम के आधीन होते हैं। लाभ व हानि के लिए निवेशक खुद ही जिम्मेदार होंगे।





